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Monday, 21 November 2016

आओ कुछ खास करे

आओ कुछ खास करे
हाथों में ले हाथ
मीलों खामोश चले।

अहसास कुछ होने कुछ पाने का,
खामोशियों का श्रंगार कर
बातें बेहिसाब करे।
आओ कुछ खास करे।

धूप छाँव
कुछ तेरी कुछ मेरी
आसमां की तपिश पर
बारिशों की फुहार करे
आओ कुछ खास करे।

पल जो  हरपल बदलता
पल पल जीया करें
वक्त की धुंध से सन
अक्स इक दूसरे का देख
आईना साफ किया करें।
आओ कुछ खास करे।

उधार की खुशियों में
कब तक खुद को जलाए गे
सदा महके जो
शमां वो रोशन करें
आओ कुछ खास करे।

गुजरी जैसे भी गुजर गई
गिनती की सासें जो बची
हर साँस वो जीया करे
आओ कुछ खास करे।

Sandeep khosla

www.ownmyviews.blogspot.com

Friday, 18 November 2016

सिद्ध पीठश्री हरि दरबार

सिद्ध पीठश्री हरि दरबार

बाकेंबिहारी का द्वार

सदा रहे यहां मेरी सरकार

गुरु जी मेरे यहाँ करते निवास

चरणकमलों मे उनके सारे तीर्थधाम।


ना मांगू मै हीरे मोती

ना सूखदूख से मुझे सरोकार

वक्त से सीखी अदा

मांगो वो  जो है सदा

रिमझिम ठंडी फूहार यहां पर

सूरज का प्रकाश यहां पर

बाकें बिहारी मेरी सरकार

सिद्ध पीठश्री हरि दरबार

गुरु जी मेरे करते निवास।


कर्मविमोचन होते सारे

संकटमोचन यहां विराजे

हरि धाम यह मुक्तिधाम है

गुरु जी मेरे  जहां करते निवास।

गीता का ज्ञान यहीं पर 

सत्य सरिता बहे यही पर

शब्द का सार यही पर

हरिदासी मधुशाला यही पर

सिद्ध पीठश्री हरि दरबार।


बाकेंबिहारी का द्वार

सदा रहे यहां मेरी सरकार

गुरु जी मेरे करते निवास

चरणकमलों मे उनके सारे तीर्थ धाम

संदीप खोसला