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Thursday, 9 April 2015

माँ मै बहु ले आया

मुझे आज भी याद है वो दिन,

तुने जब कहा था,

माँ

मै बहु ले आया,

तेरे आराम का सामान ले आया।

तेरे बुढे हाथों पर छाले देखे नहीं जाते,

मरहम प्यार वाली मै ले आया।

अश्क अब ना बहाएगी,

चिटकनी खोलने भी तु ना जाएगी,

माँ,

मै बहु ले आया।

सुई में धागा भी तु ना डालेगी,

अरमान फरमान सब पूरे होगे,

बैठ हुक्म चलाना तु, अब

माँ,

मै बहु ले आया।

दीवारों से बातें अब ना करोगी,

साथ देने को तेरा अब,

माँ,

मै बहु ले आया।

दुध का कर्ज चुका ना पाउंगा,

ममता को सजदा, सेवा करने को अब,

माँ,

मै बहु ले आया।

बेटी बन तुझको पूजेगी,

दवा दुआ सी करेगी,अब

माँ,

मै बहु ले आया।

चंद दिनों मे मेरे बेटे,क्या हो गया,

प्यार दुलार कहाँ खो गया।

वो रोटी जो भाती थी तुझको,

जली जली सी क्यु  लगने लगी।

दुध के कर्ज की बातें करने वाला,

मोहताज दुध का क्यु हो गया।

मेरे बेटे,

एहतराम भले ना कर मेरा,

अहसान मुझपर एक करना,

चेहरा अपना रोज दिखा देना।

बहु बेटी ना बन सकी तो क्या,

राज यह अपनी बेटी से छुपा लेना।

आईना देखे जो कभी,

झलक मेरी खुद मे पा लेना।

बस यही दुआ है मेरी,