Search This Blog

Saturday, 20 December 2014

कुछ ऐसी बात करो

दर्द उनको हो न हो,

दवा दुआ सी तुम करो,

कुछ ऐसी बात करो।

आँधियों ने बुझा दिए चिराग जिनके,

घर उनका जा रोशन तुम करो,

कुछ ऐसी बात करो।

खुश्क आखो की नमी तुम बनो,

बुझे चेहरों पर रोशनाई बिखरो,

कुछ ऐसी बात करो।

तिजारत है मजहब जिन के लिए,

हज उनको भी करा दो,

कुछ ऐसी बात करो।

जीने के लिए मुहब्बत है जरुरी,

नफरतों से तौबा तुम करो,

कुछ ऐसी बात करो।

संदीप जिक्र तेरा महफिलों मे हो न हो,

फिक्र फिर भी सब की करो,

कुछ ऐसी बात करो।