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Sunday, 3 August 2014

तस्वीर




कभी ख्याबों मे कभी ख्यालो मे,

कभी किताबो मे कभी तस्वीरो मे,

तेरा जिक्रअब भी है मेरी तकरीरो मे।

अब वक्त की धुंध भी धुंधला न कर पाएगी

,ये तेरा है कि तेरी तस्वीर का जादु

 खुब खुबसुरत तेरी तस्वीर है

,देख लगता जैसे वक्त वही ठहर गया।

न तु बदली न तेरे चेहरे की लकीरें,

यु लग़ता खुदा तुझ पर मेहरबान है।

वक्त जहां पर ठहर गया ,

वो तेरा ,तेरी तस्वीर का नाम है।

अजब कशिश है तेरी तस्वीर मे,

तु नही पास फ़िर भी आसपास लगती है,

तुझ सेअच्छी तेरी तस्वीर लगती है,

कुछ न कह कर भी सब कुछ कहती है,